ईद पर जाने अल्लाह का क्या आदेश है
इस ब्लॉग को पढ़ लो आप कभी मांस को हाथ तक नहीं लगाओगे.. 600 साल पहले जब परमेश्वर कबीर साहिब जी काशी में आये थे तो अपना अनमोल तत्वज्ञान जन-जन में प्रचारित करते थे और हमें समझाया करते थे और कहते थे कि आपको जो ये ज्ञान मार्गदर्शक(नकली धर्मगुरु) मिले हुए है ये सब अधूरे ज्ञान पर आधारित है। ये सब आपको गुमराह कर रहे है। लेकिन इन नकली धर्मगुरुओं ने काल प्रेरणा से अपने स्वार्थवश हमें अपने परमात्मा का ही दुश्मन बना दिया। परमात्मा का घोर विरोध करवा दिया। क्योंकि उस समय जनता अशिक्षित थी। इसी बात का लाभ यह नकली धर्मगुरु उठाते रहे और हमें अपने परमात्मा से दूर रखे रखा। जब परमात्मा अपने ज्ञान का प्रचार कहते थे तब हिन्दू और मुसलमान दोनों को समझाया करते थे कि जो साधना तुम कह रहे हो वह साधना तुम्हारी ठीक नहीं है। आप सब शास्त्रविधि को त्यागकर मनमानी पूजाएँ कर रहे हो इन साधनाओं से न तो आपको कोई सुख होगा और न ही कोई गति होगी। ये आपकी गीताजी बता रही है। लेकिन वह नकली स्वार्थी लोग इस बात को ऊपर नहीं आने देते थे। वह जनता को अपने शिक्षित होने का एवं परमेश्वर कबीर साहिब जी के अशिक्षित होने का हवाला देकर भ...